भावनात्मक ज्ञान (Emotional Intelligence)

भावनात्मक ज्ञान (Emotional Intelligence)

हरेक मनुष्य का अलग व्यक्तित्व होता है। हम सब की ज़रूरतें विभिन्न होती है और हरेक व्यक्ति अपनी भावना अलग तरीक़े से जाहिर करता है।

अपनी भावना को समझने की क्षमता और किस प्रकार से आपकी भावना दूसरों को प्रभावित करती है की समझ को हम भावनात्मक ज्ञान कह सकते हैं।

भावनात्मक ज्ञान में दूसरों के प्रति आपकी धारणा भी शामिल है। जब आप दूसरों की भावना को समझते हैं तो आप उनके साथ अच्छे सम्बन्ध बना सकते हैं।

जिस व्यक्ति का भावनात्मक ज्ञान अच्छा है वह ग़ुस्सा नहीं होता, परेशान नहीं होता और झुँझलाता नहीं है इसलिए दूसरे उनके साथ काम करना पसंद करते है।

जिस व्यक्ति का भावनात्मक ज्ञान अच्छा होता है वह ज्यादा से ज्यादा काम में सफल होता है। ये इसलिए होता है क्यों की दूसरे उनके साथ काम करना पसंद करते हैं।

जब उन्हें जरूरत पड़ती है तो दूसरे लोग उनकी मदद करते हैं क्योंकि उन्हें ऐसे व्यक्ति का साथ अच्छा लगता है। और यही कारण है की अच्छे भावनात्मक ज्ञान वाला व्यक्ति हरेक काम में सफलता प्राप्त करता है।

भावनात्मक ज्ञान के लक्षण

भावनात्मक ज्ञान के पाँच तत्व हैं। जिसकी रूपरेखा की रचना एक अमेरिकी मनोवैज्ञानिक ने की है, जिनका नाम डेनियल गोलेमन (Daniel Goleman) है।

1. आत्म जागरूकता (Self Awareness). उचे भावनात्मक ज्ञान वाले व्यक्ति आम तौर पर आत्म जागरूक होते हैं। वे अपनी भावना को समझते हैं और इसलिए वो अपनी भावना को अपने ऊपर शासन नहीं करने देते हैं।

उन को अपने पर विश्वास होता है क्योंकि उन को अपने अंतर्ज्ञान पर भरोसा होता है। वे भावनाओं को नियंत्रण से बाहर नहीं होने देते हैं। वह ईमानदारी के साथ अपने अन्दर झाँकने को तैयार रहते हैं। वे अपनी शक्ति और कमजोरी को समझते हैं और वह अपनी कमजोरी

को दूर करने की पूरी कोशिश करते हैं जिससे की वह अपने काम में अच्छा प्रदर्शन कर सके। काफी लोग ऐसा मानते हैं की आत्म जागरूकता, भावनात्मक ज्ञान की सबसे ज़रूरी कड़ी है।

2. स्व नियमन (Self regulation). यह भावनाओं और आवेगों को नियंत्रित करने की क्षमता है। जो लोग स्वयं को वि नियमित रखते हैं वे दूसरों पर ग़ुस्सा या उनसे जलन नहीं करते हैं। वे आवेगी या लापरवाह निर्णय नहीं लेते हैं। वे कोई कार्य करने से पहले सोचते हैं। स्व नियमन के लक्षण हैं, सोचविचार में सावधानी, अखंडता और ना कहने की क्षमता।

3. अभिप्रेरण (Motivation). ऊँचे स्तर के भावनात्मक ज्ञान वाला व्यक्ति आम तौर पर अभि प्रेरित होता है। वे दूर की सोचते हैं और लम्बे समय के बाद आने वाली बड़ी सफलता के लिए तत्काल परिणाम को स्थगित करने के लिए तैयार रहते हैं। वे अत्यधिक उत्पादक होते हैं। वे चुनौती स्वीकार करते है और उनका काम प्रभावित करता है।

4. सहानुभूति(Empathy). दूसरों की ज़रूरतें और दृष्टिकोण को समझने की क्षमता को हम सहानुभूति(Empathy) कहते हैं। सहानुभूति पूर्ण व्यक्ति दूसरों की भावना को समझता है तब भी जब वो स्पष्ट न हों। और इसीलिए एक सहानुभूति पूर्ण व्यक्ति दूसरों के साथ संबंध जोड़ ने में उत्कृष्ट होता है। वो रुढ़िवादी नहीं होते और दूसरों को पहचान ने में जल्दी बाजी नहीं करते हैं। वे अपनी जिन्दगी एक खुले और ईमानदार तरीक़े से जीते हैं।

5. सामाजिक कौशल (Social स्किल्स). आम तौर पर एक अच्छे सामाजिक कौशल वाले व्यक्ति के साथ संपर्क रखना आसान होता है, और ये भावनात्मक ज्ञान की एक और निशानी है। जिनका सामाजिक कौशल मजबूत होता है वो टीम प्लेयर्स (team players) होते हैं।

अपने स्वयं की सफलता पर ध्यान केंद्रित करने की बजाय, वे दूसरों को विकसित होने के लिए मदद करते हैं। वे विवादों का प्रबंधन कर सकते हैं, उत्कृष्ट संचारक (communicator) होते हैं और रिश्तों को बनाने और बनाए रखने में माहिर होते हैं।

भावनात्मक ज्ञान आपके जीवन में और ख़ास कर आपके काम में सफलता के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो सकता है। लोगों और संबंधों का प्रबंधन करने की क्षमता सभी नेताओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। भावनात्मक ज्ञान का उपयोग दूसरों को आप के अंदर के नेता और विकास शीलता को दिखाने का एक अच्छा तरीक़ा हो सकता है.

अपने भावनात्मक ज्ञान में सुधार कैसे करें।

भावनात्मक ज्ञान सिखाया और विकसित किया जा सकता है। आप इन सुझावों का उपयोग भी कर सकते हैं:

• निरीक्षण करें की लोगों के प्रति आपकी प्रतिक्रिया क्या है। क्या आप बिना तथ्यों के और जल्दी बाज़ी में निर्णय करते हैं? क्या आप रुढ़िवादी हैं ? आप ईमानदारी के साथ देखें की अन्य लोगों के साथ आप कैसा बर्ताव करते हैं। खुद को उनकी जगह में डाल कर देखिये और उनके दृष्टिकोण और ज़रूरतों को स्वीकार करना सीखिए।

• अपने काम के माहौल को देखिये। क्या आप अपनी उपलब्धि यों के लिए ध्यान की तलाश करते हैं ? विनम्रता एक अद्भुत गुणवत्ता है और इसका मतलब यह नहीं है कि आप शर्मीले हो या आत्म विश्वास की कमी है। दूसरों को अच्छे कम करने के लिए बँधाई का पात्र बनने का मौक़ा दें और उन पर ध्यान केंद्रित होने दें और खुद के लिए प्रशंसा प्राप्त करने की ज्यादा चिंता न करें।

• आत्म – मूल्यांकन करें। आप में क्या कमजोरी है ? क्या आप स्वीकार करते हैं कि आप में कुछ कमजोरी है और उन क्षेत्रों पर आप काम करने के लिए तैयार हैं जो आपको एक बेहतर इनसान बनने में मदद कर सकती है ? अपने अन्दर ईमानदारी से देखने का साहस करें – यह आपके जीवन को बदल सकता है।

• तनाव पूर्ण स्थिति यों में आपकी प्रतिक्रिया कैसी होती है, इसका विश्लेषण करें। क्या आप परेशान हो जाते हैं या झुजलातें है जब किसी काम में देरी हो या जिस तरह से आप चाहते हैं वो नहीं होता है ? क्या आप दूसरों को दोष देते हैं और उन पर नाराज़ हो जाते हैं, तब भी जब उनकी गलती नहीं है? व्यापार की दुनिया में और उससे बाहर भी, कठिन परिस्थितियों में शांत और नियंत्रण में रहने की क्षमता अत्यधिक महत्वपूर्ण है। जब कोई बात बिगड़ जाए फिर भी अपनी भावनाओं को नियंत्रण के तहत रखें।

• अपने कार्यों के लिए जिम्मेदारी लें। यदि आप किसी की भावनाओं को चोट पहुँचाते हैं तो उनसे सीधे माफ़ी मांगिये। लोग आम तौर पर माफ कर देते हैं और भूल जाते हैं अगर आप सम्बन्ध सुधारने का एक ईमानदार प्रयास करने के लिए तैयार हैं।

• कोई भी कार्यवाई करने से पहले जाँच करें की कैसे आपकी कार्यवाई दूसरों को प्रभावित करती है। यदि आपका निर्णय दूसरों को प्रभावित करेगा तो खुद को उनकी जगह पर डाल कर देखिए की आप को कैसा लगेगा ? क्या आप वो अनुभव चाहेंगे ? यदि कार्रवाई करनी ज़रूरी है तो उसके प्रभाव से बचने में दूसरों के मदद का तरीका खोजिये। ?

भावनात्मक ज्ञान अपने कार्यों और भावनाओं, और कैसे वे आप के आसपास के लोगों को प्रभावित करती है के बारे में जागरूकता है । इसका यह भी मतलब है कि आप दूसरों के मूल्य को समझते हैं , और उनकी जरूरतों को जानने के लिए और उनसे सहानुभूति करने के लिए और उनसे सम्बन्ध बनाने में सक्षम हैं।

लेखक

प्रशांत गुप्ता

 

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