व्यावहारिक प्रशिक्षण (Practical Training)

एक माहिर  चोर के बेटे ने अपने पिता से कहा कि वो उसे चोरी करने  के तरीके और  रहस्यों को सिखाये। पुराना चोर सहमत हो गया और उस रात वो अपने बेटे को एक बड़े घर में चोरी करने के लिए ले गया। जब उस घर के सारे  लोग सो गए तो वो युवा प्रशिक्षु,  अपने बेटे को उस घर के एक कमरे में ले गया, जिसमे कपडे की एक अलमारी थी। उसने अपने बेटे को कहा की वो उस अलमारी के अन्दर जाये और कुछ कपडे चुरा कर ले आये। जब उसका लड़का अलमारी  के अन्दर गया तो उस चोर ने अलमारी बंद कर दी और ताला लगा दिया। और फिर वो घर के बाहर गया और दरवाजे की घंटी बजा दी और घर के लोगों के  जागते हिं वो चुपके से वहां से भाग गया और अपने घर चला गया। काफी समय के बाद उसका बेटा, घबरायी और थकी हालत में घर वापस पहुँचा , और गुस्सा  होकर बोला ” पिताजी आपने  ऐसा क्यों किआ, आपने  मुझे अलमारी में क्यों बंद किया ।”  मैं बड़ी परेशानी और मुश्किल से वहां से बच कर भाग सका। अगर मैंने अपनी सारी  अकलमंदी इस्तेमाल नहीं की होती तो कभी बच कर नहीं निकल पाता और पकड़ा जाता।
माहिर चोर ने मुस्कुराते हुए कहा ” बेटे, ये तुम्हारा पहला सबक था।”
कहानी का नैतिक मूल: जब आपकी पीठ दीवार से सटी होती है और कोई रास्ता नज़र नहीं आता है तो  आपका दिमाग सबसे ज्यादा तेज़ काम करता है। यह पुरानी लड़ो या भागो वाली  प्रतिक्रिया है।  यह बुनियादी वृत्ति है। 

* Hindi translation of a Zen Story.

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