How to be assertive ?

निश्चयात्मक और दृढ़ कैसे बनें (How to be assertive?)

assertive

पारंपरिक ज्ञान कहता है कि निश्चयात्मक और दृढ़ व्यक्ति अपने लक्ष्य में सफल होता है। एक  दृढ़ और निश्चयात्मक व्यक्ति अपने विचारों को दूसरों से कहने में हिचकिचाता नहीं है। उसे जो चाहिए वो दूसरों से मांग लेता है। अपने दिल की बात खुल कर कहता है और नकारात्मक जवाब को स्वीकार नहीं करता है। आप भी निश्चयात्मक और दृढ़ बन सकतें हैं।  सही मात्रा में दृढ़ता, दूसरों के प्रति सम्मान और सही सोच समझ आपको सफलता प्रदान करेगी और एक अच्छा  नायक (leader) बनने में मदद करेगी।

परिभाषा 

बिना दूसरे व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन किये हुए अपने अधिकारों को जताना  को हम दृढ़ता (assertiveness) कह सकते हैं। इसको हम दबंग होना भी कह सकते हैं।

निष्पक्ष और उचित साधन का उपयोग करते हुए आप जो चाहते हैं को पाना को भी हम   दृढ़ता कह सकते हैं।

दृढ़ता और आक्रामकता में फर्क

दृढ़ता और आक्रामकता में फर्क समझना ज़रूरी है। अपने निश्चय में दृढ़ होना को हम  आक्रामक होना नहीं कह सकते हैं।  आक्रामक व्यवहार  दूसरों के अधिकारों का उलंघन करता है और अपने अधिकारों को पाने के लिए ऐसा करना उचित नहीं है।

दृढ़ता का विपरीत  आक्रामकता नहीं है। दृढ़ता का विपरीत दृढ़ नहीं होना है। अगर आप अपने अधिकारों के लिए खड़े नहीं होते हैं तो आप दृढ़ और निश्चयात्मक नहीं हैं।

किस परस्थिति में दृढ़ और निश्चयात्मक होना ज़रूरी है। इस बात को हम कुछ उदाहरण के ज़रिये से समझते हैं।

1.  मान लीजिये की आप ट्रेन से सफर कर रहे हैं और आपके बगल में बैठा व्यक्ति सिग्रेट पी रहा है जो उसको नियम के मुताबिक़ नहीं करना चाहिए और आप उसको मना करते हैं तो इसको आपकी दृढ़ता कह सकते हैं।

2.  आप कोई वस्तु  एक दुकान से  खरीदतें है और वो ख़राब निकलती है तो  उसको वापस करने के लिए और उसका मूल्य भी वापस लेने के लिये दृढता दिखानी पड़ेगी।

3.  वेतन वृद्धि की मांग करने के लिये भी आपको  दृढता का प्रदर्शन करना पड़ सकता है।

4.  आपके अधीन व्यक्ति अगर सही काम नहीं कर रहे हैं तो  उनको फटकारने के लिए भी आपको दृढता दिखानी पड़ेगी।

दृढता के लिए कुछ सुझाव 

1.  अगर आप किसी व्यक्ति को कुछ कह रहें हैं और वोह आपको नज़रंदाज़ कर रहा है तो वही बात आप और जोर और दवाब के साथ दुबारा कहें।

2.  जब आप आपनी बात कह रहे हैं और कोई आपका ध्यान भंग करना चाहे तो आप विचलित न हों और नाहीं ग़ुस्सा होँ  और अपनी बात कहते रहें और निश्चय और दृढ़ता के साथ कहें।

3.  जब आप किसी विषय पर दृढ़ता दिखा रहे हों तो दुसरे व्यक्ति के विचारों को समानुभूति (empathy) के नज़रिये से देखें।

4. जब आप किसी बात पर दृढ़ता दिखा रहे हों तो हावी होने की कोशिश न करें और सामान्य आवाज़ में बात करें।

5.  अगर किसी बात पर पहले हुए समझौता को कोई व्यक्ति नज़रंदाज़ कर रहा हो तो  दृढ़ता दिखाना ज़रूरी है और उसका ध्यान उस समझौता पर केंद्रित करें ।

6.  अगर अपने प्रति आपकी छवि सकारात्मक है तो आपकी निश्चय और दृढ़ता को बढ़ावा मिलेगा।

7.  तनाव की स्तिथि में दृढ़ता बनाये रखना मुश्किल हो जाता है।

8.  अगर आप से बात करते हुए कोई आक्रामक हो रहा है तो भी आप अपना संतुलन बनाये रखें और चुप रहें । उसे ये जानने दें की आप उसकी बात गौर से सुन रहे हैं और उससे और खुलाशा देने को कहें।

याद रखने वाले सिधांत 

1.  अपनी दृढ़ता की मात्रा का आकलन करें और दूसरों की प्रतिक्रिया जानें।

2.  यथार्थवादी लक्ष्यों को निर्धारित करें और अपने व्यवहार में छोटे परिवर्तन लाएं।

3.  सहयोगियों के साथ रिश्ते बना कर रखें जिससे जब आप कुछ चाहते हैं तो उनसे बिना झिजक कह सकें।

4.  दृढ़ता हरेक परस्थिति में सही नहीं होता हैं। मौक़े का जायज़ा लेकर ही कोई कदम लें।

5.  अपना संतुलन बरक़रार रखें। किसी भी परस्थिति में आक्रामक न हों।

 

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